भारत में गुटखा से हो रही मौतें — पूरा सच जानिए। गुटखे का काला सच | 5 रुपये का जहर कैसे आपकी जिंदगी खत्म करता है | Gutkha Truth in India




गुटखा खाना सही है? इसे सरकार बंद क्यों नहीं करते हैं? Is it okay to eat gutkha? Why doesn't the government ban it?

भारत में हर साल लाखों लोग एक ऐसी चीज़ की वजह से मर रहे हैं, जो सिर्फ 1 से ₹5 रोपिये में काही पे भी मिल जाती है। न इसे कोई पूरी तरह बंद करता है। और न इसे खरीदने के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत पड़ती है। और सबसे डरावनी बात यह है कि जिस चीज़ को लोग अपने मुँह में रखते हैं, वही धीरे-धीरे उनका मुँह को ही छीन लेता है। आज हम बात करने वाले हैं गुटखे की। और इस आर्टिकल के बाद शायद आप कभी गुटखे को हाथ न  लगाएँ।

भारत में करोड़ों लोग रोज़ घुटका खाते हैं छोटे बच्चे से लेकर बड़े बुजुर्ग तक गुटखा खाने लगे है। उन 10,12 साल के लड़को को भी इस गुटखे की आदत लगा दी गई है। जो बड़े बड़े सेलेब्रेटी गुटखे की अड़स करते हैं जिस के कारण, इन छोटे बच्चों को भी यह लगता है कि गुटका खाना बहुत ही अच्छा हैं। और ये छोटे लड़के बड़े होने से पहले कैंसर की चपेट में आकर मर जाते हैं।

कई सर्वे बताती हैं कि कुछ बच्चे सिर्फ 7–8 साल की उम्र से ही गुटका या तंबाकू लेना शुरू कर देते हैं। आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 2 करोड़ से ज्यादा बच्चे किसी न किसी रूप में तंबाकू या गुटके का इस्तेमाल करते हैं। फिर भी अपनी सरकार गुटखा बंद किउ नहीं करती हैं, मैं इस चिजू को आगे बताऔंग इसे याद रखना।

जब बच्चे छोटसी उम्र में घुटके की आदत डाल लेते हैं, तो बाद में इसे छोड़ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। भारत में करोड़ों लोग रोज़ गुटखा खाते हैं। आपने भी कई बार लोगों को अलग-अलग जगहों पर गुटखा खाते हुए देखा होगा। जैसे की— बस स्टैंड पर, ऑफिस के बाहर, रिक्शा चलाते हुए या काम करते हुए। कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक छोटी सी आदत है, लेकिन सच यह है कि यह दुनिया के सबसे खतरनाक नशों में से एक है।

  • भारत में मुँह के कैंसर के आंकड़े ? (Oral cancer statistics in India? 

HDFC बैंक के Insurance के आकडे ये बोलती हैं की अगर भारत में मुँह के कैंसर की बात करें तो? ये आंकड़े बहुत डराने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल एक लाख से भी ज्यादा मुँह के कैंसर के मामले सामने आते हैं। भारतीय कैंसर सोसायटी के अनुसार भारत में मुँह के कैंसर के मामले दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। यह पुरुषों में सबसे आम और महिलाओं में तीसरा सबसे आम कैंसर है। इसके अलावा देश में होने वाले सभी कैंसर मामलों में से लगभग 30% मुँह के कैंसर के होते हैं। कैंसर अनुसंधान की अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में भारत में मुँह के कैंसर की व्यापकता सबसे ज्यादा है और इसका सबसे बड़ा कारण है धुआँ रहित तंबाकू उत्पादों का ज्यादा सेवन, जैसे पान, खैनी, तंबाकू, सुपारी और गुटके को खान।

  • गुटखे में ऐसा रहता क्या है ? (What is there in Gutkha?

अब सवाल आता है कि गुटखा में आखिर ऐसा क्या होता है। कई लोग सोचते हैं कि गुटखा तो सिर्फ सुपारी है, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। गुटखा के एक छोटे से पाउच में तंबाकू, सुपारी, चूना, केमिकल फ्लेवर और निकोटिन होता है। (इस निकोटिन सबद को याद रखे, सब से बडा कम इसका ही होता हैं। आगे आपको बताऔंग ) ये सभी चीजें मिलकर एक ऐसा ज़हर बनाती हैं जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खत्म करता रहता है।

  • कौन सी बीमारी होती है? और इसे लोग छोड़ते क्यों नहीं है? (What are these diseases? And why don't people get rid of them?

गुटखा खाने से शरीर में कई खतरनाक बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं, जैसे मुँह का कैंसर, गले का कैंसर, दाँत और मसूड़ों का सड़ना, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और पेट तथा लिवर की समस्या। भारत में मुँह के कैंसर के सबसे बड़े कारणों में गुटखा और तंबाकू शामिल हैं। कई लोगों का मुँह इतना खराब हो जाता है कि वे ठीक से बोल भी नहीं पाते। अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि अगर गुटखा इतना खतरनाक है तो लोग इसे छोड़ क्यों नहीं पाते। इसका कारण है निकोटिनजो आपको सुरवात मे बोला था। निकोटिन दिमाग में डोपामिन नाम का केमिकल रिलीज करता है, जिससे इंसान को थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस होता है। धीरे-धीरे दिमाग उसी चीज़ का आदी हो जाता है और फिर इंसान चाहकर भी गुटखा नहीं छोड़ पाता।

  • गुटखे से फायदा किसको है? (Who benefits from gutkha?

अब एक और बड़ा सवाल आता है कि अगर गुटखा इतना नुकसान करता है तो इससे फायदा किसको हो रहा है। फायदा हो रहा है, तबी तो बिक रहा हैं। गुटखा कंपनियों को और तंबाकू इंडस्ट्री को। यह इंडस्ट्री हर साल हजारों करोड़ रुपये कमाती है। यानी लोग अपनी सेहत खराब भी करते हैं और इन कंपनियों को पैसा भी कमा के देते हैं। 

  • सरकार इसे बंद क्यों नहीं करती है ? (Why doesn't the government stop it?

अब सवाल यह भी उठता है कि अगर गुटखा इतना खतरनाक है तो सरकार इसे पूरी तरह बंद क्यों नहीं करती। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला कारण यह है कि सरकार को इससे टैक्स मिलता है। गुटखा और पान मसाला उद्योग से भारत सरकार को हर साल लगभग 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा टैक्स मिलता है। दूसरा कारण यह है कि इस इंडस्ट्री में लाखों लोगों की नौकरी जुड़ी हुई है। तीसरा कारण यह है कि कई जगहों पर राजनीतिक दबाव भी होता है। इसी वजह से कुछ राज्यों में बैन होने के बाद भी गुटखा चोरी-छिपे बिकता रहता है।

लेकिन सच यही है कि गुटखा सिर्फ एक छोटा सा पाउच नहीं है। यह धीरे-धीरे किसी की मुस्कान, किसी का चेहरा और कई बार किसी की पूरी जिंदगी छीन लेता है। अगर आप या आपका कोई दोस्त गुटखा खाता है तो आज से ही उसे छोड़ने की कोशिश करें। क्योंकि पाँच रुपये का गुटखा आपकी पूरी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं हो सकता। हो सके तो आपके फैमिली के साथ इसआर्टिकल को शेर करे। 


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